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  2016-12-08

कब बंद होगा शिक्षा का व्यापार

क्या इस तरह बदल सकती है देश की शिक्षा संस्कृति

Education article। मेरा देश बदल रहा है ये जुमला तो हमें बहुत सुनने को मिलता है लेकिन देशवासियों का इस दिशा में प्रयास बहुत कम ही नजर आता है। कुछ ऐसे ही उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है छत्तीसगढ़ राज्य। जहां बलरामपुर-रामानुजगंज के कलेक्टर आईएएस अवनीश कुमार शरण अपनी ढाई साल की बेटी को किसी ब्रांडेड प्ले स्कूल भेजने के बजाए आंगनवाड़ी में पढ़ने के लिए भेज रहे हैं। उनका मानना है कि सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सकती है। वे बताते हैं कि उनकी बेटी को पहले खाना खिलाने में काफी दिक्कत होती थी, लेकिन डेढ़ महीने में उसे आंगनवाड़ी का खाना अच्छा लगने लगा।

                कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने बलरामपुर ब्लॉक के सभी आंगनवाड़ी केंद्रो को प्ले स्कूल की तर्ज पर मॉडल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। आपको बता दे कि पिछले दिनों केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने छत्तीसगढ़ के आंगनवाड़ी केंद्रों के पाठ्यक्रम को छोटे बच्चों के लिए बहुत लाभदायक बताया था। उन्होंने इस सिलेबस को देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रो पर लागू करने की भी बात कही थी।

इस तरह से देखा जाए तो आंगनवाड़ी सिलेबस को लेकर छत्तीसगढ़ एक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

                    वर्तमान परिवेश में देखा जाए तो दिनोंदिन शिक्षा महंगी होती जा रही है। आसान शब्दों में कहे तो बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना आज आम आदमी के दायरे से बाहर की बात हो गई है। देश बदल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि देश की शिक्षा व्यवस्था भी बदली जाएगी। इसके लिए आने वाली पीढ़ी को मजबूत बनाना होगा, और इसके लिए जरूरी है कि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके। अच्छी शिक्षा पाना हर बच्चे का अधिकार तो है लेकिन उस तक हर बच्चे की पहुंच बनाना बहुत जरूरी है।

            आर्थिक तौर पर सक्षम और लेविश लाइफ जीने वाले लोगों का भरोसा सरकारी स्कूलों से उठ चुका है। वे तो अपने बच्चों को बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ा लेते हैं, लेकिन आम आदमी कहां जाए। ये सवाल बड़ा है। इस सवाल का जवाब भी हमारे पास है। किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था वहां की संस्कृति के रूप में देखी जाती है, और संस्कृति में बदलाव लाना एक क्रांति लाने जैसा है। दुनियाभर में शिक्षा पर होने वाला कोई भी विमर्श या सेमीनार फ़िनलैंड का जिक्र किए बिना पूरा नहीं हो सकता। फ़िनलैंड की इस सफलता का रहस्य वहां की संस्कृति और शिक्षा व्यवस्था में है।

                प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस स्किल्ड इंडिया की बात लगातार कर रहे हैं। उसका मॉडल फिनलैंड में 1970 के दशक से काम कर रहा है। फिनलैंड ने बहुत पहले समझ लिया था कि उस जैसे  देश को जहां नैचुरल रिसोर्स नहीं है अगर आगे बढ़ना है तो स्किल्ड लोग, हर तरह के काम में निपुण लोगों की फौज खड़ी करनी होगी। फिनलैंड के वोकेशनल स्कूल वही काम कर रहे हैंI इसमें बड़ी भूमिका टीचरों की रही हैI शिक्षकों की रही हैI

                 फिनलैंड एक ऐसा देश है जिसके एक हिस्से में 51 दिन की रात होती है। सूरज निकल ही नहीं पाता है। उस वक्त इस देश के बारे में कहते हैं कि वहां सिर्फ जंगल हैI लेकिन आज फिनलैंड की बात होती है तो मोबाइल बनाने वाली कंपनी नोकिया की बात होती है। कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम Linux की बात होती है। अब हर किसी के हाथ में एंड्राइड फोन है, एंड्राइड के पीछे लाइनेक्स है। दुनिया के बेहतरीन सुपर कम्प्यूटर के पीछे भी लाइनेक्स है। एंग्री बर्ड के बारे में सुना है आपने, बच्चे तो दिवाने हैं इसके। इसे बनाने वाली कंपनी रोवियो भी फिनलैंड की है। फिनलैंड दुनिया में आज सबसे विकसित देशों में से एक है।

                   फिनलैंड जैसी शिक्षा व्यवस्था भारत में बनाने के लिए हम सबको स्वयं पहल करनी होगी। जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों की विशेष भूमिका होगी। एक आदेश निकाल दिया जाए कि सभी सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे। यदि वो इस नियम का पालन नहीं करते हैं तो उन्हें अपनी सरकारी नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। फिर देखिए सरकारी स्कूलों की किस तरह से कायापलट होती है। किस तरह से देश में शिक्षा का स्तर सुधरता है। किस तरह से सरकारी स्कूलों में एडमिशन के लिए लाइन लगती है। वहीं राज्य और केंद्र सरकार को भी शिक्षा संरचना को विकसित करना होगा। ये एक ऐसा प्रयास होगा जिससे शिक्षा बिकाऊ होने से बच जाएगी। और हर बच्चे के हक में अच्छी शिक्षा आ पाएगी। तब सही मायनों में देश बदलेगा, विकास की ओर बढ़ेगा।

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